Vol. 01, No. 06 (May-Jun 2026)

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इक्कीसवीं सदी के जनजातीय उपन्यासों का अवलोकन

प्रदीप कुमार सौर, प्रो. राजेन्द्र यादव

📄 PDF [Page No. 1-4]


पाचन संबंधी विकारों के प्रबंधन में योग की भूमिका: एक गहन अध्ययन

दिव्यांश कुमार, डॉ. धनंजय कुमार जैन

📄 PDF [Page No. 5-8]


मोटापे से संबंधित विकारों के प्रबंधन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण

खुशबू श्रीवास, डॉ. धनंजय कुमार जैन

📄 PDF [Page No. 9-11]


इक्कीसवीं सदी की दलित कविताओं में स्त्री चेतना व प्रतिरोध के स्वर

डॉ. राजा राम, डॉ. दिलसुख राम

📄 PDF [Page No. 12-22]


एशियाई समाजवाद के परिप्रेक्ष्य में डॉ. राममनोहर लोहिया के विचार

सुभाष चन्द्र सामन्त, साहेब

📄 PDF [Page No. 23-25]


मृदुला गर्ग के उपन्यासों में स्त्री स्वावलंबन के माध्यम से मुक्ति की आकांक्षा

कौसर साबिदा सुल्ताना

📄 PDF [Page No. 26-30]


Human Suffering in the Poetry of Keki Daruwalla

Shweta M. Shilu

📄 PDF [Page No. 31-36]


Magic Realism in the Cinema of North-East India: A Study of Emuthi Puthi and Mishing

Abhilasha Pathak, Runjun Devi, Mrinmoy Doley

📄 PDF [Page No. 37-44]


हिंदी साहित्य के विकास का नृवंशशास्त्रीय एवं भाषाई आधार: आर्य-द्रविड़ संलयन के परिप्रेक्ष्य में

अनुपम कुमार राम

📄 PDF [Page No. 45-48]


ममता कालिया के उपन्यासों का आलोचनात्मक अनुशीलन

डॉ. आम्रपाली कुमारी

📄 PDF [Page No. 49-52]


सविनय अवज्ञा आंदोलन और आदिवासी भागीदारी (1930-1934): झारखण्ड के विशेष संदर्भ में

मसकलन तोपनो

📄 PDF [Page No. 53-58]


क्षेत्रीय उद्योगों का राष्ट्रीय महत्व: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

आराधना शर्मा

📄 PDF [Page No. 59-64]


आदिवासी स्त्री विमर्श और मातृवंशीयता: खासी जनजाति का सामाजिक विश्लेषण

डॉ. सुप्रिया सिंह

📄 PDF [Page No. 65-69]


सुशीला टाकभौरे की कहानियों में दलित समाज और स्त्री चेतना

पूर्णिमा सूर्यवंशी, डॉ. इसाबेला लकड़ा

📄 PDF [Page No. 70-74]


चौधरी चरण सिंह व्यक्तित्व के विभिन्न आयाम: एक विश्लेषण

विपिन कुमार शर्मा

📄 PDF [Page No. 75-77]


रीतिकालीन कवि ‘सेनापति’ की बहुज्ञता

डॉ. अतुल कुमार पाण्डेय

📄 PDF [Page No. 78-82]


Not Walking into Oblivion: Ageism and Counter-Narratives to Ageism in the Global South

Dr. Sourav Banerjee

📄 PDF [Page No. 83-90]


Gendered Socialization, Postcolonial Anxiety, and the Fragmented Female Subject in Kiran Desai’s Fiction

Dr. Darshita P. Dave

📄 PDF [Page No. 91-94]


भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आधुनिक विज्ञान: एक तुलनात्मक एवं एकीकृत अध्ययन

प्रकाश कुमार चंद्राकर

📄 PDF [Page No. 95-98]